समास हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसे CTET, TET, REET, BPSC, SSC, रेलवे, पुलिस, UPSSSC तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए समझना उपयोगी है। इस लेख में आपको समास की परिभाषा, समास-विग्रह, समास के भेद और महत्वपूर्ण उदाहरण आसान भाषा में मिलेंगे। साथ ही, नीचे दिए गए लिंक से समास के संपूर्ण PDF Notes भी डाउनलोड कर सकते हैं।
समास क्या है?
जब दो या दो से अधिक संबंधित शब्दों के बीच आने वाले विभक्ति-चिह्नों को हटाकर उन्हें मिलाया जाता है और एक नया संक्षिप्त शब्द बनता है, तो उस मेल को समास कहा जाता है। समास का मुख्य उद्देश्य कम शब्दों में अधिक अर्थ को व्यक्त करना है।
उदाहरण:
- हाथ के लिए कड़ी = हथकड़ी
- रसोई के लिए घर = रसोईघर
- नील और कमल = नीलकमल
सामासिक शब्द क्या है?
समास के नियमों से बने शब्द को सामासिक शब्द या समस्त पद कहा जाता है। समास होने पर शब्दों के बीच मौजूद विभक्ति-चिह्नों का लोप हो जाता है।
उदाहरण:
नील + कमल = नीलकमल
समास-विग्रह क्या है?
किसी सामासिक शब्द को उसके मूल पदों में अलग करके उनके बीच के संबंध को स्पष्ट करने की प्रक्रिया को समास-विग्रह कहते हैं।
उदाहरण:
माता-पिता = माता और पिता
समास के कितने भेद होते हैं?
आपके उपलब्ध नोट्स के अनुसार समास के मुख्यतः छह प्रकार हैं:
- अव्ययीभाव समास
- तत्पुरुष समास
- कर्मधारय समास
- द्विगु समास
- द्वंद्व समास
- बहुव्रीहि समास
1. अव्ययीभाव समास
जिस समास में प्रथम पद अव्यय होता है और उसका अर्थ प्रधान होता है, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।
उदाहरण:
- प्रतिदिन = प्रत्येक दिन
- प्रतिवर्ष = हर वर्ष
- यथासमय = समय के अनुसार
- यथाशीघ्र = शीघ्रता से
- भरपेट = पेट भरकर
- हाथोंहाथ = हाथ ही हाथ में
2. तत्पुरुष समास
तत्पुरुष समास में दूसरा पद प्रधान होता है और दोनों पदों के बीच किसी कारक का संबंध होता है। इसके प्रमुख भेद कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान, सम्बन्ध और अधिकरण हैं।
उदाहरण:
- राजकुमार = राजा का कुमार
- धर्मग्रंथ = धर्म का ग्रंथ
- राजमहल = राजा का महल
- मनचाहा = मन से चाहा
- विद्यालय = विद्या के लिए आलय
- गंगाजल = गंगा का जल
- जलमग्न = जल में मग्न
3. कर्मधारय समास
जिस समास में विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय का संबंध होता है, उसे कर्मधारय समास कहा जाता है।
उदाहरण:
- नीलगगन = नीला है जो गगन
- महापुरुष = महान है जो पुरुष
- महादेव = महान है जो देव
- नीलकमल = नीला है जो कमल
- चन्द्रमुख = चन्द्र जैसा मुख
4. द्विगु समास
जिस समास में पूर्वपद संख्यावाचक होता है और उससे समूह या समाहार का बोध होता है, उसे द्विगु समास कहते हैं।
उदाहरण:
- दोपहर = दो पहरों का समाहार
- त्रिवेणी = तीन वेणियों का समूह
- त्रिलोक = तीन लोकों का समाहार
- पंचतंत्र = पाँच तंत्रों का समूह
- नवरात्र = नौ रात्रियों का समूह
- सप्ताह = सात दिनों का समूह
5. द्वंद्व समास
जिस समास में दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं और उनके बीच सामान्यतः ‘और’, ‘या’ अथवा ‘अथवा’ जैसे संबंध का बोध होता है, उसे द्वंद्व समास कहा जाता है।
उदाहरण:
- माता-पिता = माता और पिता
- दिन-रात = दिन और रात
- सुख-दुःख = सुख और दुःख
- देश-विदेश = देश और विदेश
- अमीर-गरीब = अमीर और गरीब
द्वंद्व समास के प्रमुख भेद हैं—इतरेतर द्वंद्व, समाहार द्वंद्व और वैकल्पिक द्वंद्व।
6. बहुव्रीहि समास
बहुव्रीहि समास में कोई भी पद प्रधान नहीं होता। दोनों पद मिलकर किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का बोध कराते हैं।
उदाहरण:
- त्रिनेत्र = तीन नेत्र हैं जिसके
- नीलकंठ = नीला है कंठ जिसका
- लम्बोदर = लम्बा है उदर जिसका
- दशानन = दस हैं आनन जिसके
- चतुर्भुज = चार भुजाओं वाला
- वीणापाणी = वीणा है जिसके हाथ में
आपके notes में बहुव्रीहि के पाँच प्रकार भी दिए गए हैं—समानाधिकरण, व्यधिकरण, तुल्ययोग, व्यतिहार और प्रादी बहुव्रीहि।
समास और संधि में अंतर
समास में मुख्य रूप से पदों और उनके अर्थ-संबंध का महत्व होता है, जबकि संधि में वर्णों और उच्चारण के नियमों का महत्व होता है। समास में बने शब्द का विग्रह किया जाता है, जबकि संधि से बने शब्द का विच्छेद किया जाता है।
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